कह दो जो भी कहना है,हर मौके की तैयारी क्या जो भी कहना ,सच कहना,सच कहने में दुश्वारी क्या गुज़र गया वो एक दौर था,जब सच पर पाबंदी थी नाप तौल कर क्या कहते हो,इतनी भी बाज़ारी क्या लफ्ज़ तुम्हारे ज़बाँ तुम्हारी,किसी और की क्यों कहना इल्म रहे की ज़िंदा हो तुम,हरदम ये मुरदारी क्या जो हाफ़िज़ कहते है ख़ुद को,सच से अक्सर डरते हैं हमको तुमको डर कैसा,सड़को की मारामारी क्या बारूदी साज़िश से लेकिन,नींव घरों की न दरके तेरा घर है,मेरा घर है,किसकी नम्बरदारी क्या अल्फाजों के हमले कर दो,संगीनों से मत बोलो घर की बुनियादें हिलने तक,ये जंग रहेगी जारी क्या कह दो..कह दो..कह दो..कह दो.. :/शंकर सिंह राय @shankarsinghrai ©Shankar Singh Rai #कह_दो #FarmersBill2020 #farmersprotest #जिल्दसाज़ी #bharatband