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KhaultiSyahi

कृष्ण
साकार या निराकार?
उनका कहना है कि परमात्मा अदृश्य होकर भी सबका दृष्टा है। वह सर्वज्ञ, सबका कारण, सब कुछ देने वाला, समस्त रूपों का अंत करने वाला, रूपरहित और सबका पोषक है। परन्तु भगवान् के सूक्ष्म दर्शी भक्त ऐसा नहीं मानते हैं। वे पूछते हैं - यदि कोई तेजस्वी पुरुष - साकार पुरुषोत्तम नहीं है तो वह तेज किसका है?

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#KrsnaLove #love #Form #Formless #Life

KhaultiSyahi

KhaultiSyahi

KhaultiSyahi

|| श्री कृष्ण लीला ||
अभिमान तब आता है,
जब हमें लगता है हमने
कुछ काम किया है और
सम्मान तब मिलता है,
जब दुनिया को लगता है कि
आपने कुछ महत्वपूर्ण काम
किया है।

©KhaultiSyahi #cycle #krishna_flute #Krishna #Krishnalove #krsna #KrsnaLove 
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KhaultiSyahi

कोन है राधा??
प्रेम की सागर मेरी राधा |
अनंत प्रेम के मोती राधा |
फूलों की खुशबू है राधा |
नदियां की धारा है राधा।
मोहन को मोह लेती राधा |
प्रेम प्रेम में तपती राधा |
श्याम के मन मैं बसती राधा |
वृंदावन की हस्ती राधा।
महारास की जान है राधा।
मिश्री से भी मीठी राधा।
श्याम चंदा तो चकोरी राधा |
वंशीवट की छैया राधा |
मुरली की हर धुन है राधा ।
प्रेम का हर कण-कण है राधा |
मोहन की मनमीत है राधा।
सूरज की किरणों सी राधा।
आधी कृष्णा आधी राधा ।
गोविन्द का आधार है राधा |

©KhaultiSyahi #lonelynight #radha #krishna_flute #RadhaKrishna #khaultisyahi #truth #love #krsna #KrsnaLove

KhaultiSyahi

ONE OF THE EPIC SCENES OF
MAHABHARATA
SHRI KRISHNA WANTS TO BREAK THE
PRIDE, BHEESMA HAD ABOUT HIS VOW

HE TELLS HIM THAT "DHARMA" IS NOT
JUST ABOUT FOLLOWING "RULES"
IF FOLLOWING A "VOW" IS CAUSING
WRONG REPERCUSSIONS THEN ONE
MUST NOT HESITATE TO BREAK IT

©KhaultiSyahi #SAD #Mahabharat #krishna #krsna #KrsnaLove #jaysrikrsna #krishna_flute #truth #lifeexperience

KhaultiSyahi

krishna vani । कृष्ण वाणी ॥
किसी को बहस से जीतने
के बजाय मौन से
पराजित करना चाहिए
क्योंकि जो आपके साथ
सदा बहस करने के लिए
तत्पर रहता है वो आपके
मौन को कभी भी
सहन नहीं कर सकेगा
।· कृष्ण ज्ञान • ।

©KhaultiSyahi #God #krsna #KrsnaLove #krsnadevotee #krsnaprem #jaysrikrsna #jaishrikrishna #krishna_flute #Krishna

KhaultiSyahi

श्री कृष्णा : "धर्म" से सम्मान मिलता
है अंगराज.."जीवन" में..यदि "अपमान"
मिले..तो ये समझना उचित होगा..
कि.."धर्म" का "वहन" नहीं किया...
कर्ण : और..जिसे "जन्म" से केवल..
"अपमान" ही मिला हो..
वो क्या करे वासुदेव...?
श्री कृष्णा : "सम्मान" के लिये "संघर्ष"
करे.. किन्तु "अधर्म" का साथ न दे..
अपने "अधिकार" के लिये.. अवश्य
लड़े.. किन्तु.. जिस पर "अधिकार" नहीं..
उसका "मोह" न करे...

©KhaultiSyahi #Krishna #jaishreekrishna #harekrishna #jaysrikrsna #krsna #KrsnaLove #krsnadevotee #khaultisyahi #krsnaprem

KhaultiSyahi

8कृष्ण की चेतावनी
हरि ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान् कुपित होकर बोले-
'जंजीर बढ़ा कर साथ मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।
यह देख, गगन मुझमें लय
यह देख, पवन मुझमें लय
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल ।
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें
'उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि बन्ध को घेरे हैं,
मैनाक -मेरु पग मेरे हैं।
दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,
सब हैं मेरे मुख के अन्दर
'दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
• मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर- अक्षर,
नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर ।
शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,
शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र ।
‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
शत कोटि विष्णु जलपति, धनेश,
शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,
शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
जजीर बढ़ाकर साथ इन्हें,
हाँ- हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।
-An extract from Rashmirathi -
Krishna ki chetavani (Krishna
Duryodhan Samvad

©KhaultiSyahi #navratri #krsna #KrsnaLove #Chetavni #Mahabharat #Duryodhana #khaultisyahi #Krishna #krishna_flute #God

KhaultiSyahi

कृष्ण की चेतावनी
हरि ने भीषण हुंकार किया,
अपना स्वरूप विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान् कुपित होकर बोले-
'जंजीर बढ़ा कर साथ मुझे,
हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।
यह देख, गगन मुझमें लय
यह देख, पवन मुझमें लय
मुझमें विलीन झंकार सकल,
मुझमें लय है संसार सकल ।
अमरत्व फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें
'उदयाचल मेरा दीप्त भाल,
भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि बन्ध को घेरे हैं,
मैनाक -मेरु पग मेरे हैं।
दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर,
सब हैं मेरे मुख के अन्दर
'दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
• मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग, क्षर- अक्षर,
नश्वर मनुष्य सुरजाति अमर ।
शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र,
शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र ।
‘शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश,
शत कोटि विष्णु जलपति, धनेश,
शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल,
शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
जजीर बढ़ाकर साथ इन्हें,
हाँ- हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।
-An extract from Rashmirathi -
Krishna ki chetavani (Krishna
Duryodhan Samvad)

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